Magh Mela 2021: संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने का है प्लान तो कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट साथ लेकर जरूर जाएं

नई दिल्ली।  मकर संक्रांति से प्रयागराज में माघ मेला की शुरुआत गुरुवार से होगी। इस मेले में लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाएंगे। लेकिन इस बाद यह डुबकी लगाना आसान नहीं होगा। प्रत्येक श्रद्धालु को अपने साथ कोरोना टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट लानी होगी। सभी घाटों पर सोशल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए स्नान करना होगा।  सुरक्षा और संक्रमण के खतरे को देखते हुए महिला हेल्प डेस्क और कोरोना हेल्प डेस्क भी बनाई गई हैं। जहां लोगों को आपात स्थिति में हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। 

बता दें कि प्राचीन संगम तट पर हर साल लगने वाले माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। करीब 5 लाख साधु संत यहां अस्थाई निवास बनाकर रहते हैं। ये मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक विशेष पूजा करते हैं। इन्हें कल्पवासी भी कहा जाता है। कोरोना काल में भीड़ को नियंत्रित करने के साथ सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित घर वापस भेजना मेला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

मेले में श्रद्धालुओं, कल्पवासियों और साधु-संतों को कोविड की निगेटिव जांच रिपोर्ट के बाद ही मेले में प्रवेश की अनुमित मिलेगी। उन्हें अधिकतम तीन दिन पुरानी RT-PCR की निगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य होगी।

मेले में आने वाले कल्पवासियों का डेटाबेस भी तैयार किया जा रहा है। 15-15 दिनों में दो बार रैपिड एंटीजन किट से हर कल्पवासी की कोविड जांच भी कराई जाएगी। इसके अलावा शिविर में अगर एक भी श्रद्धालु की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो सभी लोगों को 15 दिन के लिए आइसोलेट भी किया जाएगा। इस बार कोविड.19 को देखते हुए मेले में अधिक भीड़ न हो, इसलिए मेले में जरूरी दुकानों को छोड़कर बाकी दुकानों पर पाबंदी रहेगी।

ये है कोरोना से बचने की तैयारी

मेला क्षेत्र में 6 बूथों पर कोरोना एंटीजन और RTPCR टेस्ट होगा।

20 मोबाइल परीक्षण वैन लगाई जाएंगी।

20-20 बेड के दो अस्पताल त्रिवेणी सेक्टर और चार अस्पताल में गंगा सेक्टर में बने हैं।

संक्रमितों की पहचान के लिए 100 टीमें डोर टू डोर जांच करेंगी।

मेले में प्रवास के दौरान सभी कल्पवासियों का तीन बार एंटीजन टेस्ट कराया जाएगा।

मेले के 16 प्रवेश मार्गों में थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था कर दी गई है।

स्टेटिक कोविड सैंपलिंग सेंटर से मेला क्षेत्र में संक्रमितों की पहचान के लिए प्रतिदिन 500 से 600 टेस्ट कराए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग बुजुर्गों के शिविर में नियमित अंतराल के बाद बीपी, डायबटीज और ऑक्सीजन की जांच होगी।

स्वास्थ्य कर्मी रोजाना लोगों का हाल लेंगे। हर 15 दिन में एंटीजन टेस्ट भी कराया जाएगा।

भूले बिछड़ों के शिविर में भी हुआ पहली बार ये बदलाव

माघ मेला 2021 में इस बार भी खोया-पाया शिविर लगेगा। हालांकि इस बार सुविधा थोड़ी हाइटेक होगी। बिछड़ने वाले लोगों को मिलाने के लिए एनाउंस करने के साथ ‘भारत सेवा दल भूले भटके शिविर’ की वेबसाइट और वॉट्सऐप ग्रुपों पर भी उनकी फोटो डाली जाएगी, जो पहली बार हो रहा है। फोटो एक से दूसरे ग्रुप में भेजी जाएगी। शहर से बाहर रहने वाले स्वयंसेवक भी फोटो को अलग-अलग ग्रुपों में भेजने में सक्रिय रहेंगे।

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