जॉब के लिए भारतीय बने UAE की पहली पसंद , पाकिस्तान को लगा झटका 

नई दिल्ली। आतंकवाद का समर्थन करना पाकिस्तान को भारी पड़ता जा रहा है। इसी कारण UAE ने पाकिस्तानियों से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। जॉब के लिए उसकी पहली पसंद भारतीय बने हैं। इसका कारण उनका नेचर है। भारतीय लाेग काम के मामले में काफी एक्टिव रहते हैं। वे सिफारिश की जगह खुद के काम के बल पर जॉब हासिल करते हैं। वे किसी भी आतंकी गतिविधियों में शामिल नहीं होते हैं। 

आपको बता  दें कि UAE एक जमाने में पाकिस्तान का अच्छा  दोस्त था। उसकी  मदद के लिए हमेशा खड़ा रहता था। लेकिन खुलेआम आतंकियों के समर्थन के कारण सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने उससे मूंह मोड़ना शुरू कर दिया है। इसका सीधा फायदा भारत को मिला। 

इससे द्विपक्षीय व्यापार तो कई गुना बढ़ा ही साथ ही यहां भारतीय नागरिकों को रोजगार के ज्यादा मौके भी मिल रहे हैं। यूएई ने नवंबर के अंत में पाकिस्तान समेत 13 देशों के नागरिकों पर वीसा बैन लगाकर लाखों लोगों को देश में न आने के निर्देश दिए थे।  इस आदेश से पाकिस्तान के करीब 20 हजार लोगों का रोजगार छिन गया था। लेकिन इस दौरान करीब करीब 80 फीसदी जॉब भारतीयों को मिले हैं। हालांकि यूएई ने इसका कारण कोरोना वायरस के कारण उपजे हालातों को बाताया है। 

यूएई और सऊदी अरब के साथ लंबे समय तल्खी कायम रखना पाकिस्तान असंभव नजर आ रहा है। बीते साल नवंबर में इन दोनों देशों में रहने वाले पाकिस्तानियों ने करीब 8.3 हजार करोड़ रुपए स्वदेश भेजे थे। पाकिस्तान के लिए यह राशि संजीवनी का काम करती है।  पूरी दुनिया से पाकिस्तानी जितनी रकम घर भेजते हैं उसका 65% खाड़ी देशों से आता है। लेकिन UAE के इस कदम ने पाकिस्तान को मुसीबत में डाल दिया है। पाकिस्तान के पीएम इरफान खान ने इस मामले में UAE से संपर्क किया है लेकिन फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। 

भारत ने जब कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए खत्म किया तो पाकिस्तान को पूरी उम्मीद थी कि मुस्लिम देश होने के नाते सऊदी अरब और यूएई भारत का विरोध करेंगे। लेकिन, पाकिस्तान की मंशा निराशा में बदल गई। इस मसले पर तुर्की ने पाकिस्तान को समर्थन जरूर किया लेकिन बाद में उसने भी अपने कई बयानों से किनारा कर लिया। लेकिन इस घटना से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  पाकिस्तान को घाटा हुआ है। तुर्की का समर्थन करने से खाड़ी देश विशेषकर सऊदी अरब  पाकिस्तान से बेहद नाराज है। सूत्रों की मानें तो  इसी कारण तुर्की ने पाकिस्तान को जल्द से जल्द 300 करोड़ डॉलर का कर्ज वापस करने को कहा है।

पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब और यूएई का महत्व पाक सरकार द्वारा जारी किए आंकड़ों से भी पता चलता है। 2019 में जितने पाकिस्तान देश के बाहर रोजगार के लिए निकले, उनमें से 87 फीसदी सऊदी अरब या यूएई पहुंचे। इस वक्त भी सऊदी अरब में करीब 26 लाख और यूएई में करीब 15 लाख पाकिस्तानी काम करते हैं। यूएई में भारतीयों की संख्या पाकिस्तानियों की तुलना में ज्यादा है। वहां, इस समय करीब 26 लाख भारतीय काम कर रहे हैं।

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