मकर संक्रांति पर्व पर मनोकामना पूर्ति के लिए करें ऊँ आदित्याय नम: मंत्र का जाप

नई दिल्ली। सूर्यपूजा का पर्व मकर संक्रांति गुरुवार, 14 जनवरी को है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों के राजा हैं। सभी नौ ग्रह उनकी परिक्रमा करते हैं। इसी कारण पृथ्वी पर जीवन संभव हाे सका है। ग्रंथों के अनुसार शिवजी, गणेशजी, विष्णुजी, देवी दुर्गा के साथ सूर्य ऐसे देवता हैं जो कलयुग में साक्षात दर्शन देते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जब सूर्य नारायण मकर राशि में आते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। ये दो ऋतुओं के संधिकाल का समय होता है। इसी कारण इन दिनों में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। मकर संक्रांति से खान-पान में बदलाव होते हैं। इन दिनों तिल-गुड़ का सेवन करने से मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। ​​​​​​​

बता दें कि सूर्यदेव का विवाह संज्ञा नामक देव कन्या से हुआ था। यमराज और यमुना इनकी संतानें हैं। संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पा रही थीं, तब उन्होंने अपनी छाया को सूर्यदेव की सेवा में लगा दिया। शनिदेव सूर्य और छाया की संतान हैं। छाया की संतान होने की कारण शनिदेव का रंग काला है।

ज्योतिष मान्यता के अनुसार शनि अपने पिता सूर्य से शत्रुता रखते हैं। लेकिन, सूर्य शनि के साथ समभाव रखते हैं यानी सूर्य शनि को शत्रु नहीं मानते। सूर्य सात घोड़ों के रथ पर सवार रहते हैं। वे कभी रुकते नहीं हैं। रथ के 7 घोड़े सप्ताह के 7 दिनों के प्रतीक हैं। गरुड़देव के भाई अरुण सूर्य के सारथी हैं।

इस दिन सूर्य की पूजा में ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ दिनकराय नम: आदि मंत्रों का जाप किया जाता है। अपनी इच्छा के अनुसार किसी एक मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। गायत्री मंत्र का जाप करते हुए भी सूर्य की पूजा की जा सकती है। ग्रंथों के अनुसार त्रेतायुग में सुग्रीव का जन्म सूर्यदेव के अंश से हुआ था। द्वापर युग में सूर्य देव ने कुंती को एक पुत्र दिया था, जिसे कर्ण के नाम से जाना जाता है। हनुमानजी ने सूर्य को अपना गुरु बनाया था। सूर्य से ही उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया था।

 

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