सुप्रीम कोर्ट की केन्द्र को नसीहत, किसानों के हालात समझकर जल्द निर्णय करें 

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार और किसानों के बीच छिड़ चुकी जंग को 42 दिन बीत चुके हैं। लेकिन अभी तक कृषि कानून की वापसी को लेकर सरकार अडिग है। सरकार के रुख से नाराज किसान नेता भी मैंदान छोड़ने के लिए राजी नहीं है। इसी बीच पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट ने अपने संज्ञान में लिया। बुधवार को  जस्टिस एस ए बोबडे की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि किसानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं है। सरकार को जल्द उनके पक्ष में कोई सटीक निर्णय करना चाहिए। 

इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में अपना पक्ष रखने आए सॉलिसिटर जनरल और अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि सरकार की किसानों से अच्छे माहौल के लिए लगातार बातचीत हो रही है। आने वाले समय में इसका असर देखने को मिल सकता है।  इस कारण फिलहाल इस केस की सुनवाई करना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने उनकी बात को मानते हुए सुनवाई सोमवार तक टाल दी। 

सुनवाई टलने के बाद किसानों ने 7 जनवरी को दिल्ली के चारों ओर ट्रैक्टर मार्च  निकालने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि अगर सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती है तो किसान आंदोलन के लिए आगामी नीति बनाएंगे। प्रदर्शन के लिए हरियाणा की करीब 250 महिलाएं ट्रैक्टर चलाने की ट्रेनिंग ले रही हैं। बता दें कि किसानों और सरकार के बीच 4 जनवरी की मीटिंग बेनतीजा रही और अगली तारीख 8 जनवरी तय हुई। इस बैठक में कोई न कोई नतीजा जरूर आएगा। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं। 

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