नवजात वार्ड से गायब रहते थे डॉक्टर, कई सालों से नहीं हुआ मैंटिनेंस, इसलिए हुआ हादसा 

नई दिल्ली। जिन बच्चों को दुनिया में लाने के लिए उनकी माताओं ने 9 महीने कष्ट सहा, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही ने चंद मिनिटों में ही  9 नवजातों को काल के गाल में भेज दिया। मामला महाराष्ट्र के भंडारा जिले स्थित सरकारी अस्पताल का है। यहां नवजात शिशुओं की मौत से हर कोई स्तब्ध है। यहां अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से हुए शॉर्ट सर्किट से करीब 9 नवजात बच्चे दुनियां देखने से पहले ही चले गए।

जिला प्रशासन द्वारा गिठित टीम मामले की जांच कर रही है। इसमें अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है। जांच टीम की मानें तो अस्पताल के नवजात वार्ड में जिस समय हादसा हुआ, वहां मासूमों को देखने वाला कोई नहीं था। डॉक्टर,नर्स के साथ सुरक्षकर्मी भी गायब थे। नवजात की मौत के बाद काफी देर तक  वार्ड खाली पड़ा रहा।

यहां के नवजात वार्ड में आग लगने के कारणों की समीक्षा करने पर टीम को पता चला कि नवजात वार्ड के वार्ड बॉय अक्सर गायब रहते हैं।  जिस वक्त शॉर्ट सर्किट हुआ, उस वक्त भी वहां कोई नहीं था। यानी नवजात शिशुओं को ऐसे ही मरने के लिए छोड़ दिया गया था। इस घटना में 3 बच्चों की मौत जलने से हुई है जबकि 7 की बच्चों की मौत दम घुटने से हुई। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने मृतक बच्चों के परिजनों को 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की।

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