कमलनाथ का विकल्प खोजने में जुटी कांग्रेस, दिग्विजय गुट को मिल सकता है दीवाली गिफ्ट

नई दिल्ली। कांग्रेस ने उप चुनावों में करारी शिकस्त के बाद नए सिरे से पार्टी के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास लोगों द्वारा जमीनी नेताओं की कुंडली दिल्ली भेजी जा रही है। इसी बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा हाल में मीडिया में दिए प्रदेश की राजनीति न छोड़ने के बयान से कांग्रेस का आलाकमान नाराज होता दिख रहा है। इसका लाभ कमलनाथ के विरोधी भी उठाने की फिराक में है।

द‍िग्‍व‍िजय स‍िंह और कमलनाथ।

इससे पहले आला कमान ने दीवाली से पूर्व कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष में से कोई एक पद छोड़ने के लिए इशारा भी किया था, लेकिन वे नहीं माने। अब 28 विधानसभा सीटों के उप चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस बड़ा बदलाव करने के मूड में है।

प्रदेश की राजनीति में सक्रिय कांग्रेस नेताओं की मानें तो कमलनाथ को एक पद छोड़ना ही होगा। इस पद को भरने के लिए दिग्विजय सिंह अभी से प्रयास में जुट गए हैं। फिलहाल इस पद के लिए चंबल के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह का नाम सबसे आगे हैं। वे दिग्विजय सिंह के ग्रुप के माने जाते हैं। इसका लाभ उन्हें मिलने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही वे अपने चंबल क्षेत्र में भी अच्छा दखल रखते हैं।

कुछ नेताओं का मानना है कि वे सिंधिया के जाने से हुई क्षति को पूरा कर सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस का आला कमान जल्द ही इस मामले पर फैसला लेगा।

पूर्व में कांग्रेस आला कमान प्रदेश की बागडोर कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी को सौंप चुकी है। अजय सिंह तो नेता प्रतिपक्ष रहे लेकिन उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व नहीं मिल सका है। पार्टी ने कुछ समय तक अरुण यादव को भी मौका दिया लेकिन चुनाव से ठीक पहले कुछ नेताओं ने उनका पत्ता साफ कर कमलनाथ को मौका दिला दिया। ऐसे में अरुण यादव भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने अपना काम आला कमान तक पहुंचा दिया है। इन दिनों वे किसी भी मुद्दे पर सक्रिय रहकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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