बिहार: नीतीश के नए शिक्षामंत्री पर करप्‍शन के आरोप, सड़क पर उतरा जेडीयू

नई दिल्ली। बिहार में विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद आई नई सरकार विवादों में घिरती दिख रही है। नीतीश सरकार के शिक्षा मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। यह काम उनके  बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के कुलपति रहते समय का है।

इस मामले में उन पर  एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। इसके बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) सड़क पर आ गया है। जिसके कारण चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। 

किसी मंत्री के दागी होने का यह पहला मामला नहीं है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और इलेक्शन वॉच के अनुसार, नीतीश कैबिनेट के 14 मंत्रियों में से आठ के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज  हैं। कई के खिलाफ तो  गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

आपराधिक मामलों वाले 8 मंत्रियों में से बीजेपी के 4, जेडीयू के 2 और हम व वीआईपी के एक-एक शामिल हैं। हालांकि, चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल करते ही हंगामा शुरू हो गया। 2017 में चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनसे मिलने से भी इनकार कर दिया था।

मेवालाल चौधरी का नाम बीएयू भर्ती घोटाले में सामने आया था और राजभवन के आदेश से उनके खिलाफ 161 सहायक प्रोफेसर और कनिष्ठ वैज्ञानिकों की नियुक्ति के मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बता दें कि 12.31 रुपए की घोषित संपत्ति के साथ चौधरी सबसे अमीर मंत्री हैं। वहीं, 14 मंत्रियों की औसत संपत्ति 3.93 करोड़ रुपए है।

मेवालाल चौधरी ने अपने शपथ पत्र में आईपीसी के तहत एक आपराधिक मामला और चार गंभीर मामले घोषित किए हैं। पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री मुकेश सहनी ने पांच आपराधिक मामलों और गंभीर प्रकृति के तीन मामलों की घोषणा की है। बीजेपी के जिबेश कुमार ने भी पांच आपराधिक मामलों और गंभीर प्रकृति के चार मामलों की घोषणा की है। वहीं पांच अन्य हैं जिनके खिलाफ अलग-अलग प्रकृति के आपराधिक मामले दर्ज हैं।

आरजेडी सांसद और पार्टी प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में मेवालाल चौधरी का चुनाव यह बताने के लिए काफी है कि मुख्यमंत्री की स्थिति कमजोर हो चुकी है और बिहार चुनाव नतीजों के बाद हार गया है।

उन्होंने कहा कि 2017 में महागठबंधन से अलग होने वाले नीतीश कुमार अब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नैतिक बढ़त नहीं ले सकते हैं। यह सरकार के लिए विधानसभा में एक बड़ी शर्मिंदगी का विषय है।

तेजस्वी जहाँ पहली कैबिनेट में पहली कलम से 10 लाख नौकरियाँ देने को प्रतिबद्ध था वहीं नीतीश ने पहली कैबिनेट में नियुक्ति घोटाला करने वाले मेवालाल को मंत्री बना अपनी प्राथमिकता बता दिया।

इस मामले पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में एक फरार आरोपी को शिक्षा मंत्री बनाया गया है। हालांकि अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता पर नीतीश कुमार का प्रवचन आगे भी जारी रहेगा।

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