सोशल मीडिया पर छवि चमकाकर पा सकते हैं सस्ता लोन, ऐसे होती है क्लाइंट की बैकग्राउंड चेक

चेन्नई. अनुशासन मर्दों का गहना है, यही बात अब आपके लोन एप्लिकेशन पर लागू हो सकती है. इंटरनेट पर आपकी बदतमीजी पर्सनल लोन के ब्याज को महंगा बना सकती है. पर्सनल लोन का आम ब्याज जहां 13-17 फीसदी के बीच है, वहीं इस तरह के व्यवहार से आपके लिए लोन की ब्याज दर 30 फीसदी तक हो सकती है. ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आपका अच्छा व्यवहार आपको यह लोन सिर्फ 9 फीसदी ब्याज पर दिला सकता है. मतलब यह कि सोशल मीडिया पर आपका व्यवहार आपके वित्तीय लेन-देन को प्रभावित कर सकता है.
ऑनलाइन लोन देने वाली इंस्टा पैसा, गो पे सेंस, फेयरसेंट, कैश केयर और वोट 4 कैश जैसी लोन देने वाली कंपनियां एवं क्रेडिट मंत्री और बैंकबाजार डॉट कॉम जैसे एग्रीगेटर लोन लेने वालों के प्रोफाइल सोशल मीडिया पर चेक कर रही हैं.

25-35 साल के इन युवाओं की प्रोफाइल न सिर्फ सैलरी स्लिप/बैंक स्टेटमेंट से चेक की जा रही है, बल्कि फ़ोन लोकेशन डाटा, एसएमएस एलर्ट और सोशल मीडिया बिहैवियर भी खंगाली जा रही है. इन सबको एक अल्गो में डालकर पर्सनैलिटी स्कोर बनाया जा रहा है जिससे लोन लेने वाले बन्दे की योग्यता मापी जा रही है. क्रेडिट मंत्री और बैंकबाजार डॉट कॉम एक फैसिलिटेटर की तरह काम करते हैं जो लोन लेने वाले और बैंकों के बीच पुल का काम करते हैं. ये ग्राहकों को बताते हैं कि उन्हें सबसे बेहतर रेट कहां मिल सकते हैं. एप्प के जरिये काम करने वाली कंपनियां एनबीएफसी से करार रखती हैं.(इंस्टा पैसा और कैशे खुद ही एनबीएफसी लाइसेंस पाने की कोशिश कर रही हैं जिससे कि वे खुद लोन दे सकें. ) इंस्टा पैसा के सीइओ निखिल सामा ने कहा, ‘ हम गूगल कीवर्ड्स और विजिट की गयी वेबसाइट्स के एड्रेस की हिस्ट्री निकाल सकते हैं. हमारा अल्गो सेंटीमेंट एनालिसिस पर चलता है. ट्विटर पर गुस्से और पीपल रैगिंग जैसे इमोशन भी कैप्चर हो रहे हैं.’

क्या लोन चाहने वाला कोई व्यक्ति अपने साधनों से अधिक खर्च कर रहा है, ड्रंक ड्राइविंग करता है, जुआ खेलता है या दूसरे किसी जोखिम भरे बिहेवियर से जुड़ा है? अल्गो इन सब बातों की जानकारी देता है. कैशे के फाउंडर वी राम कुमार ने कहा, ‘हम एक इन्फॉर्मेशन ओवरलोडेड दुनिया में रह रहे हैं. आपका सोशल मीडिया फुट प्रिंट आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर असर छोड़ सकता है.’ इस तरह के एनालिसिस दरअसल वकील, फ्रीलांसर्स, कंसल्टेंट जैसे गैर वेतनभोगी लोगों की कर्ज लेने और उसे चुकाने की क्षमता के बारे में बताते हैं. उनकी कमाई बहुत अच्छी होने के बाद भी बैंक और दूसरे परंपरागत कर्जदाता उन्हें कर्ज देने से बचते हैं सामा ने कहा, “इस तरह के पेशेवरों के पास अच्छा पैसा होता है, इसलिए यह सोच उचित नहीं कि उन्हें वेतन नहीं मिलता इसलिए लोन नहीं दिया जा सकता. हम उनके मोबाइल के इस्तेमाल के तरीके, एसएमएस एलर्ट और जीपीएस लोकेशन को ट्रैक करते हैं. हम उनके पैन, आधार नंबर, जन्म की तारीख और रजिस्टर्ड मोबाइल फ़ोन की जानकारी जुटाते हैं. हम गैर परंपरागत तरीके के अलावा ट्रेडिशनल डेटा सेट पर भी निगाह रखते हैं.” अर्ली सैलरी डॉट कॉम 1-7 दिन के लिए भी लोन देती है. कंपनी मशीन स्कोरकार्ड बनाने के लिए फेसबुक और लिंक्डइन डेटा के अलावा जीपीएस कोओर्डिनेट्स का भी इस्तेमाल करती है.’

अर्ली सैलरी डॉट कॉम के को फाउंडर अक्षय मेहरोत्रा ने कहा, ‘दो बार क्रेडिट कार्ड के डिफ़ॉल्ट की वजह से हमने एक व्यक्ति का लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दिया. कुछ मिनटों के अंदर ही उसकी गर्लफ्रेंड (फेसबुक से कन्फर्म हुआ) ने उसी जीपीएस लोकेशन से लोन के लिए अप्लाई किया. हमने पाया कि महिला हर महीने अपने अकाउंट से बॉयफ्रेंड को कुछ पैसे ट्रांसफर करती है.’

सोशल मीडिया किसी की भी पहचान के लिए बेहतरीन टूल है. कर्ज देने वाली ऑनलाइन कंपनियां आवेदक के फेसबुक फॉलोवर और लिंक्डइन कनेक्शन पर भी दांव खेलती हैं. समां ने कहा, ‘आपके किसी पोस्ट पर कितने लाइक्स और कमेंट आते हैं, कितनी देर तक आप उस मीडियम को यूज करते हैं, यह सारी सूचना हमारे पास आती है. इसके बाद ब्लैक बॉक्स डिसीजन अल्गो की मदद से हम लोन देने या आवेदन रिजेक्ट करने का फैसला करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ यह सुनिश्चित करते हैं कि आप एक सही व्यक्ति हैं और आपका प्रोफाइल भरोसेमंद है.’ कई कंपनियां इ-कॉमर्स साइट्स या टेलीकॉम प्लेयर्स से संपर्क कर उन ग्राहकों के बारे में जानना चाहती हैं कि वे समय पर बिल पे करते हैं या लगातार डिफ़ॉल्ट करते हैं. कैश केयर के फाउंडर विकास शेखरी ने कहा, ‘हमारे इ-कॉमर्स पार्टनर और टेलीकॉम कंपनियां हमसे डेटा शेयर करती हैं.’ यूजर डेटा किसी थर्ड पार्टी को शेयर करना गलत लग सकता है, लेकिन एप्प डाउनलोड करते वक़्त या सर्विसेज लेते समय ही हम इसकी परमिशन दे देते हैं.

 

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