जेल से भागने में सिमी सदस्यों को इस तरह अंदर और बाहर से मिली थी मदद

भोपाल केंद्रीय जेल से 30 और 31 अक्टूबर की रात स्टुडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के 8 आतंकवादियों के भागने और बाद में पुलिस मुठभेड में मौत हो गई थी। लेकिन उन 8 सिमी सदस्यों के जेल से भागने का साक्ष्य अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। घटना की न्यायिक जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि कैदियों के फरार होने के पीछे जेल में बदइंतजामी नहीं बल्कि किसी व्यक्ति ने मदद की थी। जांच में अधिकारियों का कहना है कि जेल से भागे आतंकियों की जेल के ही किसी व्यक्ति की मदद से ही यह संभव हो पाया है।

जांच में यह भी पता चला है कि ताले की नकली चाबी और नाली के पास एक चाकू मिला, इसके अलावा जिस बैरक में कैदी रह रहे थे उसका सीसीटीवी भी बंद मिला। सबूतों के आधार पर यह भी संभव हो सकता है कि कैदियों को भगाने में मध्य प्रदेश के सीनियर अधिकारियों का हाथ हो सकता है। एक सीनियर अधिकारी ने नाम का खुलासा न करने की शर्त पर एक अंग्रेजी अखबार के रिपोर्टर को बताया कि जिस हद तक कैदियों की मदद की गई वह चौंका देने वाली है।

वहीं मध्य प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि अंदर की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव ही नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल से भागने के लिए बाहरी फंडिंग भी की गई होगी। भूपेंद्र सिंह ने आगे बताया कि इसके लिए कम से कम दो से तीन महीने से योजना बनाई जा रही होगी, क्योंकि डुप्लिकेट चाबी बनाने में इतना समय लग जाता है।

जेल अधिकारी ने खोली अंदर की पोल

अंग्रेजी अखबार के रिपोर्टर ने जब सीनियर अधिकारी से और जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि जेल में करीब 50 सीसीटीवी कैमरा हैं, जिनमें से अधिकतर काम करते हैं। लेकिन ब्लॉक बी जिसमें ये सिमी कैदी मौजूद थे वहां के तीनों सीसीटीवी का बंद हो जाना संयोग तो बिलकुल नहीं लगता। इन्हें जरूर बंद किया गया होगा। उन्होंने कहा कि इन तीनों ही कैमरे में सात दिन की मैमोरी खाली थी और इन्हें लंबे समय से बंद किया हुआ था।

ऑफिसर ने आगे बताया कि सिमी सदस्यों की लंबी प्लानिंग का ही नमूना है कि टूथब्रश से उन्होंने हर ताले की चाबी तक बना ली थी। अधिकारी के मुताबिक ब्रश को चाबी के रूप में ढालने के लिए उन्हें किसी बाहर के शख्स ने चाबियों का ढांचा दिया होगा। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पिछले सोमवार सुबह हुई वारदात के बाद राज्य सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारी जांच के लिए जेल पहुंचे थे। वहां उन्हें नाली के पास पड़ा एक चाकू भी मिला था।

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