जब ममता ने झोले से निकाली इंसान की हड्डियां और प्रधानमंत्री की टेबल पर उलट दीं

गौतम लाहिड़ी बताते हैं कि जनवरी 2001 में पश्चिम बंगाल के हामिद नापुर के छोटा अंगाड़िया इलाके में हिंसा हो गईं. इसमें तृणमूल कांग्रेस के 11 समर्थक मारे गए थे. आरोप था कि सीपीएम के लोगों ने यह हिंसा की है. ममता बनर्जी बहुत ग़ुस्से में थीं. वे पश्चिम बंगाल में लेफ़्ट पार्टी की बुद्धदेब भट्टाचार्य की सरकार को बर्ख़ास्त करने की मांग कर रही थीं, लेकिन एनडीए सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई.

ममता प्रधानमंत्री वाजपेयी से मिलने दिल्ली पहुंचीं और अपने झोले में से हडि्डयां और खोपड़ियां निकालने लगीं और एक-एक करके उन्हें वाजपेयी के सामने टेबल पर रखने लगीं तो वाजपेयी को यकायक समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है. फिर वाजपेयी ने कहा कि ये तो वाकई गंभीर मामला है लेकिन राष्ट्रपति शासन लगाना तो गृह मंत्रालय का काम है, उनकी सिफ़ारिश पर ही तो कैबिनेट फ़ैसला करेगी, इसलिए आप आडवाणी जी से मिल लिए. फिर ममता गृहमंत्री आडवाणी से मिलीं. आडवाणी ने राष्ट्रपति शासन लगाने का भरोसा तो
नहीं दिया, लेकिन सीबीआई जांच के आदेश दे दिए.

आडवाणी की दोस्ती के चलते नाराज रहीं ममता
ममता नाराज़ हो गईं. उन्हें लगा कि वाजपेयी तो तैयार हैं लेकिन आडवाणी तैयार नहीं हुए, क्योंकि उनकी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य से दोस्ती है. मुख्यमंत्री बुद्धदेब ने केन्द्र सरकार को चुनौती दी कि अगर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्य सरकार को बर्ख़ास्त करने की कोशिश की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. अगले कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाले थे, ममता बनर्जी को लगने लगा कि बीजेपी के साथ रहकर चुनाव में जाने से राज्य में मुस्लिम वोटर को हासिल करना मुश्किल काम होगा .

एनडीए से गईं और फिर एनडीए में लौटीं
ममता दी सरकार से बाहर निकलने का बहाना खोज रहीं थीं और वह मिला 2001 के तहलका स्टिंग ऑपरेशन से. ममता ने तुरंत प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखते हुए कहा कि इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद जॉर्ज फर्नांडिस को सरकार से और जया जेटली को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए. अपनी चिट्ठी में ममता ने लिखा कि हम नहीं चाहते कि किसी भी वजह से और किसी कारण से प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचे. लेकिन जब उनकी मांग को प्रधानमंत्री ने मान लिया और 15 मार्च को जब जॉर्ज फर्नांडिस अपने इस्तीफ़े का ऐलान कर रहे थे, तब दूसरी तरफ़ एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ममता बनर्जी और उनके सहयोगी मंत्री अजीत पांजा ने अपने इस्तीफ़े का ऐलान कर दिया और उनके 9 सांसदों ने सरकार से समर्थन वापसी का ऐलान किया.
जॉर्ज फर्नांडिस के साथ ममता बनर्जी

ममता ने कहा कि अब हमें जॉर्ज के इस्तीफ़े से कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि हमें लगता है कि इस स्टिंग ऑपरेशन से सरकार की छवि ख़राब हुई है. एनडीए से बाहर निकलने के कुछ दिनों बाद ही ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के चुनावों में उसी कांग्रेस के साथ तालमेल कर लिया, जिसे वे चार साल पहले 1997 में छोड़कर आईं थीं, लेकिन 2001 के विधानसभा चुनावों में ममता का मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं हो पाया.

294 सीटों वाली विधानसभा में लेफ़्ट गठबंधन को 196 सीटें मिलीं, जबकि ममता के गठबंधन को सिर्फ़ 98. उसमें तृणमूल के 60 विधायक चुन कर आए. चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी फिर से एनडीए में आने की कोशिश में लग गयीं, लेकिन बी जेपी की राज्य इकाई इसके ख़िलाफ़ थी . आख़िर में 2004 में ममता एनडीए का हिस्सा हो गयीं और कोयला मंत्री बनीं.

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