जबलपुर सांसद राकेश सिंह के हाथ में MP बीजेपी की कमान

भोपाल. जबलपुर से तीन बार सांसद और महाराष्ट्र के सह प्रभारी राकेश सिंह भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं। उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और निवर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की मौजूदगी में कार्यभार ग्रहण कर लिया। वहीं पार्टी ने केंद्रीय पंचायत मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश की चुनाव प्रबंध समिति भी गठित कर दी।

पद संभालने के बाद राकेश ने कहा- चौथी बार बनाएंगे सरकार

पद संभालने के बाद राकेश ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाएंगे। 1980 में भाजपा के गठन के बाद से राकेश 13वें प्रदेश अध्यक्ष होंगे। जबकि महाकौशल क्षेत्र से 33 साल बाद कोई नेता प्रदेश अध्यक्ष बना है। राकेश के पहले इस क्षेत्र से अप्रैल 1985 में जबलपुर के शिवप्रसाद चिनपुरिया 10 माह तक अंतरिम अध्यक्ष बने थे। शेष | पेज 10 पर
इंदौर फिर रहा बेअसर
कैलाश विजयवर्गीय को तोमर की टीम में सदस्य बनाया गया है, जबकि सह संयोजक पद पर कुलस्ते, आर्य के साथ नरोत्तम मिश्रा रखे गए हैं। इससे साफ है कि एक बार फिर इंदौर को प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं मिला। शिवराज के मंत्रिमंडल में पहले ही इंदौर से कोई मंत्री नहीं है।

इस बार का चुनाव भाजपा वर्सेज ऑल है : शिवराज सिंह
सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि आने वाले चुनाव में भाजपा वर्सेज ऑल पार्टी के बीच मुकाबला होगा। सारा विपक्ष एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। जहां तक राकेश सिंह के अध्यक्ष बनने का सवाल है तो यह भाजपा में ही है कि किसी को पता नहीं होता कि कल क्या होगा। राकेश सिंह को भी पता नहीं था कि उन्हें अध्यक्ष बनाया जा रहा है।

तोमर की चुनावी प्रबंधन टीम नरोत्तम, राजेंद्र
प्रदेश भाजपा में किसी तरह का गतिरोध पैदा न हो, इसे थामने के लिए तोमर की चुनाव प्रबंधन टीम में नरोत्तम मिश्रा, फग्गन सिंह कुलस्ते और लालसिंह आर्य को सह संयोजक बनाया गया है। सदस्य के तौर पर थावरचंद गेहलोत, प्रभात झा, कैलाश विजयवर्गीय, नंदकुमार सिंह चौहान, भूपेंद्र सिंह, राजेंद्र शुक्ला, प्रहलाद पटेल और माया सिंह को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश संगठन महामंत्री पदेन सदस्य होंगे। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह जब तोमर की टीम के बारे में बता रहे थे तब, वे नंदकुमार सिंह चौहान का नाम बताना भूल गए। बाद में सुधार किया।

नहीं पहुंचे बड़े नेता
राकेश सिंह के पदभार कार्यक्रम से बड़े नेताओं ने दूरी बना ली। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री मंगलवार को कोर कमेटी की बैठक में थे, बुधवार सुबह दिल्ली रवाना हो गए। राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इंदौर चले गए। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व थावरचंद गेहलोत भी नहीं आए। प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे तो न मंगलवार को आए और न ही बुधवार को दिखाई दिए। पार्टी को उन्होंने व्यस्तता की जानकारी जरूर दे दी थी। शिवराज सरकार के मंत्रियों में सिर्फ अंतर सिंह, विश्वास सारंग और संजय पाठक ही नजर आए।

ऐसे तय हुआ नाम : संघ का दखल और 37 सीटों पर नजर

राकेश के साथ दिल्ली में गोपनीय बैठक करने के बाद राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल उनका नाम भोपाल लेकर आए। देर रात रामलाल, मुख्यमंत्री और तोमर ने राकेश से अलग से बात की। मुख्यमंत्री और तोमर की पहली पसंद राकेश सिंह थे। इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी सहमति दी। आपसी खींचतान को खत्म करने के लिए संघ ने ही मामले में दखल रखी। तोमर, नरोत्तम मिश्रा, राजेंद्र शुक्ला और भूपेंद्र सिंह के नाम भी चर्चा में थे। तोमर के पीछे हटने के बाद बाकी नाम पर कई स्तरों पर विचार हुआ, पर केंद्र से लेकर प्रदेश तक उन पर सहमति नहीं बनी।

राकेश के नाम पर इसलिए दांव
2004 से 2018 तक सांसद रहे। उनके सांसद रहते जबलपुर को हवाई सुविधा और बड़े-बड़े फ्लाई ओवर की सुविधा मिली। वे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और संघ के करीबी भी हैं। लिहाजा दिल्ली और प्रदेश संगठन में उनका विरोध नहीं हो पाया। महाकौशल क्षेत्र से विधानसभा की 37 सीटें हैं। पिछले चुनाव में भाजपा ने 25 सीटें जीती थीं। महाकौशल-बुंदेलखंड में राकेश सिंह का नाम चर्चित है।

जातिगत समीकरण साधने की चुनौती
इस पद के लिए खड़े कई प्रबल दावेदार पिछड़ गए। इससे सीएम के सामने अब जातिगत समीकरण साधने की चुनौती है। सीएम ओबीसी चेहरा हैं। प्रदेश अध्यक्ष और चुनाव प्रबंध समिति के संयोजक ठाकुर वर्ग से हैं। दलित और आदिवासियों के पक्ष में तोमर की टीम में फग्गन सिंह कुलस्ते और लालसिंह आर्य को शामिल किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *