अब ओलिंपिक की होगी प्रोफेशनल तैयारी, बनेगी टास्क फ़ोर्स

चंडीगढ़ : देश के भावी स्मार्ट शहर की होड़ में शामिल यूटी से भविष्य के ओलंपिक चैंपियन निकलना मुश्किल नजर आता है। बात अगर अभी से वर्ष 2020 के ओलंपिक खेलों की तैयारी की करें तो दो राज्यों की राजधानी में खिलाड़ियों की आधुनिक ट्रेनिंग की दिशा में मौजूदा हालात दयनीय है। यहां पर कुछ प्रमुख खेल स्पर्धाओं की आधारभूत सुविधा इस कदर नहीं है कि सिटी में नेशनल कैंप का आयोजन किया जाना महज सपना नजर आता है। एथलेटिक्स, से लेकर रोइंग और निशानेबाज स्पर्धा में यह स्थिति बनी हुई है। यह तीनों ही ओलंपिक की मुख्य इवेंट माने जाते हैं। इनमें से किसी भी इवेंट का यहां नेशनल कैंप तो क्या कोई बड़ी इंवेट भी करना बेमानी होगा। ओलंपिक से लेकर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की टूर्नामेंट की तैयारी के लिहाज से बुनियादी स्तर पर आधारभूत सुविधाओं का दुरुस्त होना जरूरी है। खिलाड़ियों को आधुनिक ट्रेनिंग देने के मामले में यूटी एनआइएस पटियाला, एसटीसी बेंगलूरू, दिल्ली जैसे महानगरों के खेल केंद्रों के बराबर खड़ी नजर नहीं आती है।

दायरा और ध्यान केवल फुटबॉल, हॉकी और क्रिकेट की एकेडमी तक सीमित

आलम यह है कि यूटी प्रशासन का ध्यान और दायरा केवल अपनी फुटबॉल, हॉकी और क्रिकेट अकादमी तक सीमित होकर रह गया है। इनके अलावा अकादमी से बाहर और अन्य खेलों के खिलाड़ी हाशिए पर चले आ रहे हैं।

नेशनल कैंप के लिए सहयोगी स्टाफ जरूरी

खेल विशेषज्ञों की राय में नेशनल कैंप के आयोजन लिए कम से कम सहयोगी स्टाफ की जरूरत होती है, जिनमें खेल मेडिसन डॉक्‌र्ट्स, डाइटीशियन, कंडीशन एक्सपर्ट को होना जरूर है, यहां पर एक सप्ताह के छोटी अवधि के कैंप का आयोजन तो संभव हो सकता है लेकिन लंबी अवधि के कैंप मुश्किल हैं, एनआइएस पटियाला, बेंगलूरू और कोलकाता जैसे खेल सेंटर में कैंप के आयोजन में सहयोगी स्टाफ की भूमिका अहम होती है, जहां पर इस सबके लिए संपूर्ण रूप से पूरा एक विभाग होता है, जबकि यहां पर सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल से विशेषज्ञों के लिए पूरा समय देना संभव नहीं है। ओलंपिक जैसे महाकुंभ की तैयारी के लिए नेशनल कैंप अहम भूमिका निभाते हैं।

समस्याएं, जो आ रही हैं सामने

-एथलेटिक्स का कैंप लगे तो सिंथेटिक ट्रैक नहीं

-लंबे समय से यहां पर हॉकी का नेशनल कैंप नहीं लगा,

-रोइंग के कैंप के लिए सुखना झील

अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप नहीं

-शहर की सेक्टर-25 की शूटिंग रेंज

भी नेशनल कैंप लायक नहीं

‘स्मार्ट शहर की दिशा में शहर में खेलों की आधारभूत सुविधा तो कुछ भी नहीं है, मैं नए नगर प्रशासक से भी मिलना चाहता हूं क्योंकि वह खेल प्रेमी है, हमें जूनियर स्तर पर खिलाड़ियों को प्रमोट करने की जरूरत है, मेडल जीतने के बाद पैसा देना और मेडल तैयारी के लिहाज से पैसे खर्च में बेहद अंतर होता है, अगर जूनियर स्तर पर खिलाड़ी अच्छा करें तभी हम आगे बढ़ेंगे, नए प्रशासक का इन सब चीजों पर ध्यान दिलाना जरूरी है।

-रविंदर चौधरी, अंतरराष्ट्रीय फोटो फिनिश जज, सचिव, चंडीगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन

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