अतीत के बंगाल का कैसा है ‘वर्तमान’, सियासत का बदलता चेहरा

भोपाल. देश में भीमा-कोरगांव हिंसा मामले में वामपंथी विचारधारा के पांच एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी सुर्खियों में है। वामपंथ का उदय और स्वर्णिमकाल पश्चिम बंगाल को माना जाता है। यहीं से फैली वाम विचारधारा इतनी शक्तिशाली थी कि पश्चिम बंगाल में 35 सालों से ज्यादा टिकी रही और केंद्र में कौन प्रधानमंत्री बनेगा, उसका निर्णय भी करती थी। लेकिन क्या आज भी बंगाल ऐसा ही है? क्या वहां वामपंथ आज भी मजबूत स्थिति में है? कैसा है पश्चिम बंगाल का ‘वर्तमान’?…

IMG20180818124408
पश्चिम बंगाल में नंदकुमार शहर के पास का कस्बा, जहां ट्रैफिक चाैराहे पर सीएम ममता बनर्जी की तस्वीर नजर आ रही है।

हाल ही में 6 राज्यों में 4500 किमी बाइक से बंगाल के दूर-दराज के क्षेत्रों में घूमकर जाना कि बंगाल, कैसे दूसरे राज्यों से अलग है, वहां जमीनी स्तर पर लोग क्या सोचते हैं, राजनीति के प्रति उनका नजरिया क्या है, ओवरऑल बंगाल के कैसे अनुभव हुए और वहां की राजनीति का हमसे कैसा सरोकार है?

#Amazingindia सीरिज के पहले आर्टिकल में पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था पर रोशनी डाली थी, इस आर्टिकल में राजनीतिक व्यवस्था को महसूस करने की कोशिश की गई है।

17 अगस्त की रात से 19 अगस्त 2018 सुबह 10 बजे तक…ओडिशा-पश्चिम बंगाल बॉर्डर दीघा से कोलकाता होते हुए सिंगूर, वर्धमान, दुर्गापुर, आसनसोल, चितरंजन झारखंड बॉर्डर तक 430 किमी मोटरसाइकिल से यात्रा…

दीघा में कानून व्यवस्था की सख्ती की बात तो समझ में आ गई थी। अब वहां घूमते हुए एक चलती-फिरती पनवाड़ी की दुकान दिखाई जहां एक अधेड़ शख्स न्यूजपेपर पढ़ रहा था। जब उनसे न्यूजपेपर का नाम पूछा गया तो बताया बंगाली का ‘वर्तमान’। एक समय आनंद बाजार पत्रिका की पूरे बंगाल में धूम थी लेकिन उसकी जगह अब ‘वर्तमान’ और ‘प्रतिदिन’ जैसे न्यूज पेपर ने ले ली थी।

video-thumbnail.g

पोस्टर वूमेन नजर आईं ममता बनर्जी

दीघा से निकलकर अब ग्रामीण इलाकों से होते हुए कोलकाता पहुंचना था। मुझे ये महसूस करना था कि देश में जिस वामपंथ की धूम है, उसकी अपने राज्य में क्या स्थिति है? पूरे 400 किमी के रास्ते में एक भी वामपंथ या उनकी पार्टी से संबंधित बैनर-पोस्टर या दीवार पर स्लोगन नजर नहीं आया। इन पूरे रास्तों पर एक ही चेहरा नजर आया जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का था। राज्य की सड़कों पर ट्रैफिक फॉलो करने के स्लोगन थे लेकिन उनपर अनिवार्य रूप से बना था ममता का चेहरा। हाइवे के पुल से झांककर जब नीचे के शहरों को देखा तो वहां सिर्फ एक ही पोस्टर नजर आया जिसमें ममता बनर्जी कुछ कह रही थीं। बीच-बीच में कुछ ग्रामीण जगहों पर भाजपा के पोस्टर तो नजर आ गए थे लेकिन वामपंथ गायब था।

IMG20180819072755
पश्चिम बंगाल में रानीगंज, यहां भी राजनीतिक पोस्टर सिर्फ सीएम ममता बनर्जी के दिखे।

कातर आंखों ने दिया सियासत के हाल का जवाब

इस चीज को नोटिस करते ही मैं एक जगह खाना खाने रूका तो सामने बैठे शख्स से कोलकाता के बारे में जानकारी लेना शुरू की। वह कोलकाता में रहता था। उसने वहां के नियम-कायदे कानून की जानकारी देना शुरू की। बाइक चलाते समय पैरों में जूते होने चाहिए। ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस, गाड़ी के पेपर, पॉल्यूशन कंट्रोल यूनिट की एनओसी कंपल्सरी है नहीं तो केस बनेगा। यहां की पुलिस तो केस बनाने के बहाने ढूंढ़ती है। मैंने उससे धीरे से पूछ ही लिया कि भाई ये तो वामपंथ का गढ़ है लेकिन यहां तो उसका वजूद तक दिखाई नहीं दे रहा। उसने कातर आंखों से मेरी आंखो में देखा और धीरे से कहा – तभी तो ये हालत है और फिर चुप हो गया।

IMG20180818135750
कोलकाता में घुसने से पहले एक ढाबे पर खाना खाया तो बंगाल की जानकारी स्थानीय लोगों से ली।

चेहरे के पीछे जनता एकजुट

बंगाल घूमने के बाद एक चीज तो तय हो गई कि वहां चेहरा बिकता है, वह चाहें ज्योति बसु का हो, बुद्धदेव भट्टाचार्य का हो या ममता बनर्जी का। जनता चेहरे के पीछे एकजुट होकर खड़ी होती है और विरोधियों का समूल नाश कर देती है जो पहले कभी अपने थे।

इसलिए और ऐसे बदला बंगाल

मुझे लगा कि बंगाल के बारे में जो दिख रहा है और समझ में आ रहा है, ये कहीं भ्रम तो नहीं तो फिर मप्र में वामपंथ का झंडा पीढ़ी दर पीढ़ी उठाने वाले एक शख्स से बात की जिसने पुराना बंगाल और वर्तमान का बंगाल देखा था। उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंगाल से वामपंथ का वजूद मिट चुका है। जो कैडर्स कभी पार्टी की जान हुआ करते थे, उनकी हत्याएं हो चुकी हैं। वामपंथी पार्टी का ऑफिस कार्यालय भी जेल जैसा लगता है। टीएमसी और भाजपा के गठबंधन ने वामपंथ को मिटाने में कसर नहीं छोड़ी है। यही कारण है कि बंगाल में बीजेपी के पोस्टर तो कहीं-कहीं नजर आ जाते हैं लेकिन वामपंथ के नहीं। युवा बीजेपी की तरफ आकर्षित है और मुस्लिम और गरीब तबका टीएमसी की तरफ। अब तो वामपंथ दिल्ली और हिंदी बेल्ट की राजधानियों में बैठकर ही सुरक्षित बचा है।

IMG20180818180258
अतीत और वर्तमान का कोलकाता, पश्चिम बंगाल की राजधानी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *