18 लोगों की मौत का कारण बना फ्लाईओवर, वीभत्स नजर आ रहे थे शव

जीतेंद्र यादव. रहने वाले जौनपुर के हैं. 15 मई की शाम को टीवी पर उन्हें खबर दिखी कि वाराणसी में फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिर गया है, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई है. खबर सुनने के बाद जीतेंद्र अपने ड्राइवर रघुनाथ बहेलिया को फोन करने लगे, जो अपने परिवार के साथ इलाज के लिए वाराणसी आया था. रघुनाथ का फोन नहीं लगा, जिसके बाद जीतेंद्र 16 मई की सुबह करीब 6 बजे वाराणसी पहुंचे. हादसे वाली जगह पर जाकर उन्होंने देखा कि उनकी भी बोलेरो गाड़ी हादसे का शिकार हो गई है.

इसके बाद वो बीएचयू की इमरजेंसी में गए, जहां कोई जानकारी नहीं मिल पाई. ट्रॉमा सेंटर में भी रघुनाथ या किसी के भर्ती होने की जानकारी नहीं मिली तो वो पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे. वहां उन्होंने देखा कि उनके ड्राइवर रघुनाथ की मौत हो गई है. हादसे में रघुनाथ के अलावा रघुनाथ की पत्नी विद्या, बेटा अरुण, बहनोई रामचेत और पड़ोसी रामचंद्र की भी मौत हो गई है.

जीतेंद्र के मुताबिक जब उन्होंने अपने ड्राइवर और उसके परिवार के लोगों का पोस्टमॉर्टम करवाने और शवों को घर ले जाने की बात की, तो अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने पोस्टमॉर्टम के लिए 300-300 रुपये मांगे. जीतेंद्र ने पैसे दे दिए. इस दौरान उन्होंने देखा कि गाजीपुर के एक परिवार के चार लोगों की मौत हो गई है. परिवार से पोस्टमॉर्टम के लिए 400-400 रुपये मांगे जा रहे हैं.

जीतेंद्र ने इसका वीडियो बना लिया. जब ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो पोस्टमॉर्टम के लिए पैसे मांगने वाले कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया. वहीं वाराणसी के डीएम योगेश्वर राम मिश्रा ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए पल्ला झाड़ लिया.

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